बच्चों का इन्फ्लुएंजा: लक्षण और कारण

बच्चों का इन्फ्लुएंजा – लक्षण – बुखार, कंपकंपी, नाक बहना, सिरदर्द। पीड़ित मांसपेशियाँ, शरीर में दर्द। अतिसार और उलटी। सूखी खाँसी।. बच्चों का इन्फ्लुएंजा – कारण – यह तीन प्रकार के इन्फ्लुएंजा वायरस, अर्थात टाइप ए, बी या सी में से किसी एक प्रकार के वायरस द्वारा होता है।.

बच्चों का इन्फ्लुएंजा: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज

बच्चों का इन्फ्लुएंजा – आहार – ताज़ी लहसुन, मशरुम, काली चाय, साफ शोरबा जैसे चिकन, बछड़े का माँस, सब्जियाँ। अंडे, चावल, केले, टोस्ट। प्रोसेस्ड आहार, जंक फ़ूड, वसा और कैलोरी का अत्यधिक सेवन।

मायेस्थेनिया ग्रेविस: रोकथाम और जटिलताएं

मायेस्थेनिया ग्रेविस – रोकथाम – धीमे-धीमे खाएँ और कौर लेने में विराम लें। आँख पर सुरक्षा पट्टी पहनें। अत्यंत गर्म तापमान से बचाव करें। धूम्रपान ना करें।.

मायेस्थेनिया ग्रेविस: प्रमुख जानकारी और निदान

मायेस्थेनिया ग्रेविस (एमजी) दीर्घकालीन स्व-प्रतिरक्षी रोग है जो माँसपेशियों को कमजोर कर देता है। यह नाम ग्रीक और लैटिन भाषा के शब्दों से बना है जिनका अर्थ है “महत्वपूर्ण माँसपेशियों की कमजोरी”।.

मायेस्थेनिया ग्रेविस: लक्षण और कारण

मायेस्थेनिया ग्रेविस – लक्षण – कमजोर माँसपेशियाँ। कमजोरी जो आराम करने से ठीक हो जाती है और शारीरिक गतिविधि के बाद अधिक बदतर हो जाती है। दृष्टि सम्बन्धी अवरोध जैसे दोहरा दिखाई देना, दृष्टि को स्थिर कर पाने की असमर्थता और निर्जीव पलकें। थकावट. मायेस्थेनिया ग्रेविस – कारण – मायेस्थेनिया ग्रेविस माँसपेशियों को तंत्रिकाओं के संकेतों के प्रसारण सम्बन्धी समस्या से उत्पन्न होता है। यह स्व-प्रतिरक्षी स्थिति है अर्थात इसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र अपने शरीर के ही ऊतकों पर आक्रमण करता है।.

मायेस्थेनिया ग्रेविस: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज

मायेस्थेनिया ग्रेविस – आहार – लेने योग्य आहार: प्रोटीन से समृद्ध आहार जैसे फलियाँ, काबुली चने, आर्गेनिक फ्री-रेंज चिकन, कच्चे बादाम, कच्चे मेवे, सूरजमुखी के बीज, अखरोट, बादाम युक्त मख्खन/कच्चे बादाम युक्त मख्खन। सब्जियाँ/औषधीय गुणों वाली वनस्पति जैसे केल, पालक, लेट्यूस, ककड़ी, अजमोदा, प्याज, लहसुन, धनिया, अजवाइन, अदरक, हल्दी, टमाटर, कद्दू (बटरनट, स्पागेटी, केबोचा), जड़युक्त सब्जियाँ (चुकंदर, शलजम, गाजर, रूटाबेगा, शक्करकंद)। सुगंधित मसाले जैसे एक्स्ट्रा वर्जिन जैतून का तेल/नारियल का तेल, मिर्च, हल्दी, अदरक, इलायची, सेब का सिरका।

वायरल सिंड्रोम: रोकथाम और जटिलताएं

वायरल सिंड्रोम – रोकथाम – अपने हाथों को नियमित साबुन और पानी से धोएँ या अल्कोहल आधारित जेल का प्रयोग करें। पीने के गिलास या खाने के बर्तनों का बांटकर उपयोग ना करें। टीकाकरण.

वायरल सिंड्रोम: लक्षण और कारण

वायरल सिंड्रोम – लक्षण – बुखार और कंपकंपी। बहती और भरी हुई नाक। खाँसी, गले में पीड़ा या आवाज भर्राना।. वायरल सिंड्रोम – कारण – वायरस के ऐसे लगभग 900 विभिन्न प्रकार हैं जो मनुष्यों को संक्रमित कर सकते हैं।.

वायरल सिंड्रोम: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज

वायरल सिंड्रोम – आहार – लेने योग्य आहार: वायरल रोग के दौरान शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखने के लिए पानी अधिक मात्रा में पियें। फल और सब्जियों की अधिकता वाला आहार सामान्य सर्दी सहित कई प्रकार के संक्रमण और रोगों को रोकने में सहायक होता है। विशेष रूप से प्रतिरक्षक तंत्र हेतु लाभकारी फल और सब्जियों में चेरी, बेरियाँ, टमाटर, संतरे, ग्रेपफ्रूट, खट्टे रस, केले, ब्रोकोली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स और पत्तागोभी आते हैं। ज्यादा से ज्यादा ताजे फल और सब्जियाँ लें क्योंकि वे सर्वाधिक पोषक घटक प्रदान करते हैं। सूजन और अवरोध युक्त वायरल संक्रमणों को रोकने या कम करने के लिए विभिन्न सब्जियों से मिलाकर घर पर बने सूप या प्राकृतिक सूप का सेवन करें।

वायरल सिंड्रोम: प्रमुख जानकारी और निदान

वायरल सिंड्रोम किसी एक वायरस या विभिन्न प्रकार के वायरस द्वारा उत्पन्न संक्रमण है जो अधिकतर श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। लेकिन ये शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है।.