मोतियाबिंद: रोकथाम और जटिलताएं

मोतियाबिंद रोकथाम – रोकथाम का सर्वोत्तम तरीका है उन रोगों को नियंत्रित करना जो मोतियाबिंद के खतरे को बढ़ाते हैं।.

मोतियाबिंद: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज

मोतियाबिंद आहार – लेने योग्य आहार इनसे परहेज करें: प्याज, लहसुन, अजमोदा, फलियाँ, समुद्री सिवार, शलजम, गाजर, टमाटर, सेब और संतरे आदि एंटीऑक्सीडेंट का भरपूर स्रोत होते हैं और ये उन कुछ आहारों में से हैं जो मोतियाबिंद से बचाव करते हैं। हरी चाय भी एंटीऑक्सीडेंट का उत्तम स्रोत है, अपने चाय/कॉफ़ी के कप को हरी चाय के कप से बदलें। बीटा कैरोटीन और विटामिन सी तथा ई मोतियाबिंद के महत्त्वपूर्ण भोज्य उपचार हैं। सूक्ष्म पोषक तत्वों से समृद्ध आहारों में कद्दू, गाजर, रतालू, टमाटर, मेवे, पालक, मछली और जैतून का तेल आदि आते हैं।

मोतियाबिंद: प्रमुख जानकारी और निदान

मोतियाबिंद आँख के लेंस पर धुंधलापन आने को कहते हैं जो कि दृष्टि को प्रभावित करता है।.

मोतियाबिंद: लक्षण और कारण

मोतियाबिंद लक्षण – अस्पष्ट, धुंधला और बादलनुमा दिखाई पड़ना। रात के समय दृष्टि सम्बन्धी कठिनाई का बढ़ जाना। प्रकाश और चमक के प्रति संवेदनशीलता। प्रकाश के आसपास आभामंडल को देखना।. मोतियाबिंद कारण – बढ़ती आयु। अत्यधिक मदिरापान। धूम्रपान.

पलक की फुंसी: रोकथाम और जटिलताएं

पलक की फुंसी – रोकथाम – उचित स्वच्छता, अपनी आँखों को स्वच्छ रखें।.

पलक की फुंसी: लक्षण और कारण

पलक की फुंसी – लक्षण – पनीली आँखें, पलकों की सूजन, धुंधली दृष्टि. पलक की फुंसी – कारण – स्टेफायलोकोकल बैक्टीरिया.

पलक की फुंसी: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज

पलक की फुंसी – आहार – लेने योग्य आहार: विटामिन ए, सी और ई महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट हैं जो प्रतिरक्षक शक्ति को बढ़ाते हैं और बैक्टीरिया और वायरस द्वारा उत्पन्न संक्रमण रोकते हैं।
, विटामिन ए की उच्च मात्रा से युक्त आहारों में दूध, अंडे, लीवर, शक्तियुक्त दलिया, गहरे रंग के संतरे या हरी सब्जियाँ (जैसे गाजर, रतालू, कद्दू और केल), और संतरे की श्रेणी के फल जैसे केंटालूप, खुबानी, आड़ू, पपीता और आम आते हैं।
, विटामिन सी की उच्च मात्रा से युक्त आहारों में खट्टे फल, स्ट्रॉबेरी, कीवी, अमरुद, शिमला मिर्च, टमाटर, ब्रोकोली और पालक आते हैं।
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पलक की फुंसी: प्रमुख जानकारी और निदान

आँख की पलक पर होने वाली सूजन, जिसे होर्डियोलम के नाम से भी जाना जाता है, पलकों में स्थित, आँखों की ग्रंथियों का छोटा सा संक्रमण है।.

केरेटोकोनस: लक्षण और कारण

केरेटोकोनस लक्षण – बढ़ते हुए निकट दृष्टिदोष के साथ दृष्टि का धुंधला या विकृत होना। चमकीले प्रकाश और उजाले के प्रति संवेदनशीलता। रात्रि में दृष्टि सम्बन्धी समस्या।. केरेटोकोनस कारण – केरेटोकोनस की उत्पत्ति का कारण अज्ञात है। हालाँकि, इसे अनुवांशिक स्थिति या हार्मोन सम्बन्धी विसंगति के कारण उत्पन्न माना जाता है।.

केरेटोकोनस: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज

केरेटोकोनस आहार – आहार में एंटीऑक्सीडेंट से समृद्ध आहार जैसे गाजर, पालक, पपीता, ब्राज़ील नट्स, अंडे, केल, पीली मक्का, बादाम, सूरजमुखी के बीज, संतरे, केले, सेब। एंटीऑक्सीडेंट को विभिन्न आहारों से प्राप्त किया जाता है जैसे फल, सब्जियाँ, मेवे, अनाज, मीट, मछली और पोल्ट्री। प्रोसेस्ड आहार, कृत्रिम मीठे पदार्थ, तले फल, संतृप्त वसा और रिफाइंड शक्कर।