इओसिनोफिलिया: प्रमुख जानकारी और निदान

इओसिनोफिलिया क्या है?

इओसिनोफिल (एसिडोफिल) श्वेत रक्त कणिकाओं (ल्यूकोसाइट्स) का ही एक प्रकार है, जो अस्थिमज्जा में निर्मित होता है और रक्तप्रवाह और आँतों की परतों में पाया जाता है। ये शरीर के प्रतिरक्षक तंत्र, अर्थात परजीवी, बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण के विरुद्ध सुरक्षा व्यवस्था, का हिस्सा होता है।
इओसिनोफिलिया एक चिकित्सीय शब्द है, जो रक्त में या शरीर के ऊतकों में इओसिनोफिल्स की असामान्य मात्रा के बनने और इकठ्ठा होने को समझाता है।
रक्त की कुल मात्रा में 400-450 प्रति माइक्रोलीटर की इओसिनोफिल की मात्रा को अधिक माना जाता है। गंभीर प्रकार के इओसिनोफिलिया में, इओसिनोफिल्स की मात्रा 5,000 कोशिकाओं तक हो सकती है।

इओसिनोफिलिया के कई प्रकार होते हैं, जिनमें:
  • फेमिलियल इओसिनोफिलिया (पारिवारिक इओसिनोफिलिया)- यह इओसिनोफिल की वृद्धि को नियंत्रित करने वाले जीन में समस्या होने के कारण उत्पन्न होता है।
  • द्वितीयक इओसिनोफिलिया-यह परजीवी संक्रमण, स्वप्रतिरक्षी प्रतिक्रिया, एलर्जी, या अन्य सूजन उत्पन्न करने वाले रोगों से सम्बंधित होता है।
  • प्राथमिक इओसिनोफिलिया-कुछ विशेष प्रकार के ल्यूकीमिया या दीर्घकालीन माइलॉयड विकार जैसे मायेलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम से सम्बंधित इओसिनोफिल की उत्पत्ति में परिवर्तन।

जाँच और परीक्षण

रक्तप्रवाह में इओसिनोफिलिया का निर्धारण आसान सी इओसिनोफिल की मात्रा की जाँच, जो कि सीबीसी (कम्पलीट ब्लड काउंट) के हिस्से के रूप में की जाती है, के द्वारा किया जाता है। ऊतक सम्बन्धी इओसिनोफिलिया का निर्धारण सम्बंधित ऊतक की जाँच (स्किन बायोप्सी) द्वारा किया जाता है। आगे की अन्य जांचों में सीटी स्केन्स, एक्स-रे, लिवर की कार्यक्षमता की जाँच, सेरोलोजिकल परीक्षण, मल परीक्षण, और मूत्र परीक्षण किये जाते हैं।

डॉक्टर द्वारा आम सवालों के जवाब

Q1. इओसिनोफिलिया क्या है?
इओसिनोफिलिया एक चिकित्सीय शब्द है, जो रक्त में या शरीर के ऊतकों में एओसिनोफिल्स की असामान्य मात्रा के बनने और इकठ्ठा होने को समझाता है। इओसिनोफिल्स (दूसरा नाम ‘एसिडोफिल्स’), श्वेत रक्त कणिकाओं (ल्यूकोसाइट्स) का ही एक प्रकार है जो अस्थिमज्जा में निर्मित होता है, और रक्तप्रवाह और आँतों की परतों में पाया जाता है। ये शरीर के प्रतिरक्षक तंत्र, अर्थात परजीवी, बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण के विरुद्ध सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होता है। रक्त की कुल मात्रा में 400-450 प्रति माइक्रोलीटर की इओसिनोफिल की मात्रा को अधिक माना जाता है। गंभीर प्रकार के इओसिनोफिलिया में, इओसिनोफिल्स की मात्रा 5,000 कोशिकाओं तक हो सकती है।
 
Q2.यदि मैं इओसिनोफिलिया से पीड़ित हूँ, तो मुझे ये कब पता चलेगा?
बुखार, थकावट, खाँसी, सूजन, साँस लेने में कमी, केंद्रीय तन्त्रिका तंत्र की अक्रियता, माँसपेशियों में दर्द, खुजली, पेटदर्द, अतिसार, शरीर के बाहरी किनारों की तंत्रिकाओं के रोग और रक्त सम्बन्धी परिणाम ही इओसिनोफिलिया के लक्षण हैं.
 
Q3. इओसिनोफिलिया क्यों होता है?
इओसिनोफिलिया की उत्पत्ति की निश्चित कार्यप्रणाली आमतौर पर अस्पष्ट ही होती है। इओसिनोफिलिया के अधिकतर मामलों के लिए “इडियोपैथिक” शब्द प्रयुक्त होता है, जिसका अर्थ है “अज्ञात उत्पत्ति द्वारा”।
इओसिनोफिलिया किसी विशेष क्षेत्र में हुए रोग या इन कोशिकाओं के अत्यधिक उत्पन्न होने के कारण हो सकता है। इओसिनोफिलिया के प्रकार के आधार पर इसकी उत्पत्ति का कारण तय होता है। कारणों में हैं:
  • एलर्जी के रोग, जैसे अस्थमा, एक्जिमा, और एलर्जिक रायनाइटिस।
  • परजीवी कीटाणुओं द्वारा रोग
 
Q4. इओसिनोपीनीया क्या है?
इओसिनोपीनीया तनाव के कारण होता है, जैसे तीव्र बैक्टीरियल संक्रमण, और ग्लुकोकोर्टिकोइड्स से उपचार के बाद। इओसिनोपीनीया का कोई विपरीत परिणाम ज्ञात नहीं है।
 
Q5. इसकी समस्याएँ क्या हैं?
सभी प्रभावित व्यक्तियों में अस्थि मज्जा संयुक्त होती है, लेकिन सबसे गंभीर समस्या में ह्रदय और केंद्रीय तन्त्रिका तंत्र भी संलग्न होता है। अंगों की कार्यप्रणाली में कठिनाई और उनके प्रकटीकरण में अत्यंत परिवर्तन रहता है। ह्रदय में होने वाला संरचनागत परिवर्तन, थ्रोम्बोसिस, एन्डोकार्डियल फाइब्रोसिस, और रेस्ट्रिक्टिव एण्डोमायोकार्डियोपेथी तक पहुँच सकता है। अन्य अंगों के ऊतकों को होने वाली क्षति भी इसके समान ही होती है।
   
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