कोलीसिस्टाइटिस (गालब्लैडर की सूजन): प्रमुख जानकारी और निदान

कोलीसिस्टाइटिस (गालब्लैडर की सूजन) क्या है?

कोलीसिस्टाइटिस अर्थात पित्ताशय (गालब्लैडर) की सूजन। पित्ताशय एक छोटा, नाशपाती के आकार का अंग होता है जो पेट के दाहिने तरफ यकृत (लिवर) से जुड़ा होता है, जो पित्त (बाइल) को संचित रखता है और वसा के पाचन में सहायता करने के लिए इसे छोटी आंत में उत्सर्जित करता है। यह रोग पित्त की पथरी द्वारा, पित्ताशय के द्वार को अवरुद्ध कर देने के फलस्वरूप, पित्ताशय में उत्पन्न उत्तेजना और दबाव के कारण होता है। यह सूजन और संक्रमण तक पहुँच सकता है।

रोग अवधि

यदि पित्तनलिका से पित्त की कोई फंसी हुई पथरी अपने आप निकल जाए तो कुछ घंटों बाद दर्द या असहजता कम गंभीर हो जाते हैं या पूर्णतया चले जाते हैं। आपके पेट में लगभग 24 घंटों तक हल्का दर्द रह सकता है। अधिकतर लोग कोलीसिस्टाइटिस के तीव्र प्रकरणों से कुछ दिनों से लेकर कुछ सप्ताहों तक में ठीक हो जाते हैं।
रोग निर्धारण किये जाने के कई वर्षों पहले से दीर्घ कोलीसिस्टाइटिस के लक्षण उपस्थित हो सकते हैं। पित्ताशय को हटा देने हेतु की जाने वाली शल्यक्रिया से लक्षणों को वापस लौट आने से रोका जा सकता है।

जाँच और परीक्षण

रोग का निर्धारण रोगी का शारीरिक परीक्षण करके और चिकित्सीय इतिहास लेकर किया जाता है। अन्य जाँचें जिनकी सलाह दी जा सकती है, उनमें हैं:
  • रक्त परीक्षण।
  • अल्ट्रासाउंड स्कैन।
  • आकृति आधारित जाँचें जैसे पेट का एक्स-रे या कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन, मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन, कोलेंजियोपेन्क्रिएटोग्राफी के साथ मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग स्कैन (एमआरसीपी)।
  • आपके शरीर में पित्त की गति को दर्शाने वाला स्कैन। हिपेटोबिलियरी इमिनोएसिटिक एसिड (एचआईडीए) स्कैन।

डॉक्टर द्वारा आम सवालों के जवाब

1. कोलीसिस्टाइटिस क्या है?
कोलीसिस्टाइटिस अर्थात पित्ताशय (गालब्लैडर) की सूजन।

2. पित्ताशय क्या है?
पित्ताशय एक छोटा, नाशपाती के आकार का अंग होता है जो पेट के दाहिने तरफ यकृत (लिवर) से जुड़ा होता है, जो पित्त (बाइल) को संचित रखता है और वसा के पाचन में सहायता करने के लिए इसे छोटी आंत में उत्सर्जित करता है।

3. कोलीसिस्टाइटिस कैसे होता है?
यह पित्त की पथरी द्वारा, पित्ताशय के द्वार को अवरुद्ध कर देने के फलस्वरूप, पित्ताशय में उत्पन्न उत्तेजना और दबाव के कारण होता है। धीरे-धीरे यह सूजन और संक्रमण तक पहुँच सकता है।

4. ऐसे रोग से पीड़ित होने पर व्यक्ति को क्या करना चाहिए?
पानी और फलों के रस (अंगूर और सेब के अलावा) का अधिक मात्रा में सेवन करें और आहार सम्बन्धी परहेज या निषेध रखें।

5. व्यक्ति को डॉक्टर से संपर्क कब करना चाहिए?
व्यक्ति को डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि उसे पेट में तीव्र दर्द और कंपकंपी के साथ या उसके बिना बुखार हो। मतली और उल्टी और मिट्टी के रंग का मल हो। पीलिया (त्वचा और आँखों का पीला पड़ना), पीले-गहरे रंग का मूत्र, धूसर रंग का मल आदि वे कारण हैं जब व्यक्ति को डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

   
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