पौरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) की सूजन: प्रमुख जानकारी और निदान

पौरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) की सूजन क्या है?

  • जैसे जैसे पुरुषों की आयु बढ़ती जाती है, पौरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) का बढ़ना आम स्थिति होती है।
  • पौरुष ग्रंथि केवल पुरुषों में पाई जाने वाली एक छोटी ग्रंथि है, जो लिंग और मूत्राशय के बीच में होती है।
  • यदि पौरुष ग्रंथि बढ़ जाती है, यह मूत्राशय और मूत्र नलिका, जिससे मूत्र गुजरता है, पर दबाव डालती है।
  • 60 वर्ष या अधिक आयु के 60% से अधिक पुरुषों में पौरुष ग्रंथि वृद्धि की कुछ मात्रा होती है।
BPH Overview

रोग अवधि

  • हलके लक्षण औषधियों और व्यायाम के साथ लक्षणों पर निगाह रखने से ठीक हो जाते हैं।
  • गंभीर लक्षण शल्यक्रिया से ठीक होते हैं, और इसमें 4 से 6 सप्ताह का समय लगता है।

जाँच और परीक्षण

  • चिकित्सीय इतिहास
  • शारीरिक परीक्षण
  • गुदा मार्ग का डिजिटल परीक्षण
  • मूत्र का विश्लेषण (यूरीनालिसिस)
  • तंत्रिकाओं सम्बन्धी परीक्षण
  • प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन ब्लड टेस्ट (पीएसए)
  • मूत्र के प्रवाह का परीक्षण
  • ट्रांस रेक्टल अल्ट्रासाउंड
  • प्रोस्टेट की बायोप्सी
  • पोस्ट वोइड रेसिडूअल वॉल्यूम
  • इंट्रावेनस यूरोग्राफी (एक्स-रे)

डॉक्टर द्वारा आम सवालों के जवाब

Q1. बीपीएच में शराब, चाय और कॉफ़ी वर्जित हैं, क्यों?

  • शराब, कैफीन, चाय ये मूत्रवर्धक (डाईयुरेटिक) हैं।
  • ये आपके मूत्राशय में प्रविष्ट होने वाली मूत्र की मात्रा को बढ़ा देते हैं।
  • शराब सीधे ही मूत्राशय के मुख को सिकोड़ देती है, और मूत्राशय की दक्षता कम करके मूत्रत्याग को कठिन बनाती है। शराब पौरुष ग्रंथि के निकट की माँसपेशियों के ढीले होने में बाधा डालती है, जिससे मूत्राशय उत्तेजित होता है और बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया (बीपीएच) या बढ़ी हुई पौरुष ग्रंथि के लक्षण और बिगड़ते हैं। आख़िरकार, एक बाधायुक्त मूत्र मार्ग के साथ, शराब पूर्णतः अवरोध की शुरुआत करती है।
  • कॉफ़ी में उपस्थित केफीन और चाय में उपस्थित थियोफायलीन एक अतिसक्रिय मूत्राशय को उत्तेजित कर सकते हैं, इसका मतलब है कि ये मूत्र की आवृत्ति और शीघ्रता को बढ़ा सकते हैं और तीव्र असंयम उत्पन्न कर सकते हैं। दूसरी प्रकार से, चूंकि कैफीन एक थियोज़ेन्थीन है, इसलिए यह मूत्राशय को उत्तेजित करके पौरुष ग्रंथि के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। थियोफायलीन भी मूत्राशय को उत्तेजित करता है।

Q2.क्या बीपीएच कैंसर का लक्षण है?

  • नहीं
  • बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया (बीपीएच) पौरुष ग्रंथि की कैंसर मुक्त वृद्धि है जो आमतौर पर उम्र के पांचवे दशक में शुरू होती है। बीपीएच के साथ पौरुष ग्रंथि का कैंसर संभव है लेकिन बीपीएच के होने से पौरुष ग्रंथि के कैंसर की संभावना नहीं बढ़ती। हालाँकि, क्योंकि दोनों स्थितियों के शुरुआती लक्षण एक जैसे होते हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि यदि आप मूत्र सम्बन्धी स्थिति से जुड़े किन्हीं लक्षणों को अनुभव कर रहे हैं, तो डॉक्टर से मिलें।

Q3. क्या शल्यक्रिया बीपीएच के लिए सर्वोत्तम विकल्प है?

  • नहीं
  • निगरानी और प्रतीक्षा: ये उन पुरुषों के लिए आवश्यक और उत्तम विकल्प है, जिनके लक्षण हलके हैं और वे उन्हें विशेष कष्टकारक नहीं लगते।
  • औषधीय चिकित्सा: वर्तमान में बीपीएच के मध्यम स्तर के लक्षणों को नियंत्रित करने की सबसे सामान्य विधि है। बीपीएच के मध्यम स्तर के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए कई प्रकार की औषधियाँ उपलब्ध हैं।
  • अल्प शल्यक्रिया युक्त चिकित्सा: कई प्रकार की प्रक्रियाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें डॉक्टर को पौरुष ग्रंथि तक मूत्रनलिका के माध्यम से पहुँचकर, या तो ग्रंथि के आकार को छोटा करने की या मूत्रनलिका के अवरोध को हटाने की, सुविधा होती है।
शल्य चिकित्सा:
  • ऐसे रोगियों के लिए उपलब्ध शल्य चिकित्सा के विकल्पों में ट्रांसयूरेथ्रल रेसेक्शन ऑफ़ प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि का मूत्रनलिका के मार्ग से विच्छेदन), ट्रांसयूरेथ्रल लेज़र प्रोस्टेटेक्टोमी (लेज़र की प्रक्रिया द्वारा मूत्रनलिका के मार्ग से पौरुष ग्रंथि को हटाना-जिसमें विच्छेदन, ग्रंथि को हटाना और वाष्पीकरण शामिल हैं), ट्रांसयूरेथ्रल इन्सीजन ऑफ़ द प्रोस्टेट (मूत्रनलिका के मार्ग से पौरुष ग्रंथि में छिद्र करना), और ओपन प्रोस्टेटेक्टोमी (शरीर के उस हिस्से को चीरे द्वारा खोलकर पौरुष ग्रंथि को पूर्णतया हटाना-यह तब होता है जब पौरुष ग्रंथि का वजन 100 ग्राम या अधिक हो)।
   
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