ट्रिगर फिंगर: लक्षण और कारण

ट्रिगर फिंगर – लक्षण – उँगलियों में जकड़न, खासकर सुबह के समय। मुड़ी हुई स्थिति में ऊँगली का जाम होना, जिसे सीधा करने में आप असमर्थ हों। अपनी ऊँगली को सीधा करते समय और मोड़ते समय दर्द होना। सूजन. ट्रिगर फिंगर – कारण – ट्रिगर फिंगर किसी उंगली या अंगूठे के बार-बार गति करने या जोर लगाकर उपयोग करने से होता है।.

ट्रिगर फिंगर: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज

ट्रिगर फिंगर – आहार – लेने योग्य आहार इनसे परहेज करें: ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्त आहार जैसे मछली, अखरोट, अलसी के बीज आदि जिनमें सूजनरोधी गुण होते हैं।
, अन्नानास के रस में ब्रोमेलैन नामक एंजाइम होता है। ब्रोमेलैन में उपस्थित रसायन शरीर को वह प्राकृतिक पदार्थ उत्पन्न करने के लिए उत्प्रेरित करते हैं जो दर्द को दूर करते हैं और सूजन को कम करते हैं।
, ट्रिगर फिंगर से जुड़ी सूजन को दूर करने में एलो वेरा प्राथमिक कार्य करता है। इसे प्रभावित क्षेत्र पर या तो लगाया जा सकता है या पूरक की तरह लिया जा सकता है।
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एटिलेक्टेसिस: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज

एटिलेक्टेसिस आहार – लेने योग्य आहार इनसे परहेज करें: प्रतिदिन कम से कम 8 गिलास पानी या अन्य तरल पदार्थ लेने से फेफड़ों के स्राव को पतला करने में सहायता मिलती है जिससे उन्हें खांसकर बाहर निकालना सरल होता है। लहसुन में सूजनरोधी और जीवाणुरोधी गुण होते हैं जिनका प्रयोग फेफड़ों के उपचार हेतु किया जा सकता है। प्रतिदिन प्रातःकाल 3 से 4 सूखे हुए अंजीर खाना चाहिए क्योंकि सूखे अंजीर प्रतिरक्षक तंत्र को मजबूत करने के लिए बढ़िया होते हैं।

एटिलेक्टेसिस: रोकथाम और जटिलताएं

एटिलेक्टेसिस रोकथाम – धूम्रपान बंद करें। शराब सीमित मात्रा में लें। गहरे श्वास वाले व्यायाम करें।.

एटिलेक्टेसिस: प्रमुख जानकारी और निदान

एटिलेक्टेसिस हवा के लिए फेफड़ों में पाई जाने वाली थैलीनुमा रचना, जिसे अल्वेओली कहते हैं, का आंशिक या पूर्ण रूप से नष्ट हो जाने का नाम है।.

एटिलेक्टेसिस: लक्षण और कारण

एटिलेक्टेसिस लक्षण – साँस की गति तेज होना। साँस में कमी (डिस्निया)। उथली सांसें लेना। खाँसना।. एटिलेक्टेसिस कारण – एटिलेक्टेसिस हवा आने वाले मार्ग (ब्रोंकस या ब्रोंकिओल्स) में होने वाले अवरोध से या फेफड़े के बाहर से दबाव पड़ने पर उत्पन्न होता है। यह शल्यक्रिया के बाद या अस्पताल में भर्ती मरीजों में अत्यंत आम है।.

न्यूरेल्जिया: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज

न्यूरेल्जिया आहार – लेने योग्य आहार: विटामिन सी से समृद्ध फल और सब्जियाँ जैसे क्रेनबेरी, ब्रोकोली, स्ट्रॉबेरी, संतरे, ग्रेपफ्रूट, जामुन, करौंदे, टमाटर, केल और पालक लेने चाहिए क्योंकि विटामिन सी, जो कि जल में घुलनशील एंटीऑक्सीडेंट है और आपके प्रतिरक्षक तंत्र को शक्ति देता है, तंत्रिकाओं के दर्द को कम करता है। ओमेगा 3 वसीय अम्ल से समृद्ध आहार जैसे ठन्डे पानी की मछली, अलसी के बीज, अखरोट, सोयाबीन, केनोला तेल और कद्दू के बीज आदि लेने चाहिए क्योंकि ओमेगा 3 वसीय अम्ल शरीर में उपस्थित सूजन को कम करता है और तंत्रिकाओं की क्षति को रोकता है। पानी अधिक मात्रा में पियें और जल की अधिकता वाले आहार जैसे संतरे, शोरबा, लेट्युस, औषधीय चाय, आड़ू और अंगूर लेना चाहिए।

न्यूरेल्जिया: रोकथाम और जटिलताएं

न्यूरेल्जिया रोकथाम – सम्बंधित विकारों जैसे मधुमेह और गुर्दे की समस्या के उपचार करने पर कुछ प्रकार के न्यूरेल्जिया को रोका जा सकता है।.

न्यूरेल्जिया: प्रमुख जानकारी और निदान

न्यूरेल्जिया एक या अधिक तंत्रिकाओं में अनुभव होने वाले दर्द को समझाता है।.

न्यूरेल्जिया: लक्षण और कारण

न्यूरेल्जिया लक्षण – स्थान विशेष पर दर्द। प्रभावित क्षेत्र स्पर्श के प्रति असह्य रूप से संवेदनशील होता है, और किसी भी प्रकार का दबाव दर्द के रूप में महसूस होता है। प्रभावित तंत्रिका के आधार पर दर्द तीव्र या जलन युक्त हो सकता है।. न्यूरेल्जिया कारण – शिन्गल्स, संक्रमण, दबाव या चोट, सिफिलिस.